पर्यावरण संरक्षण के नियम

ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम

भारत सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 एवं इससे संबंधित नियमावली के अन्तर्गत ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियमए 2000 बनाया गया है।

इस नियम में अस्पतालों, शैक्षिक संस्थाओं और न्यायालयों के आस-पास कम से कम 100 मीटर तक के क्षेत्र को शान्त क्षेत्र/परिक्षेत्र घोषित किया गया है। उक्त अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु प्रत्येक जनपद में एक उडनदस्ते का गठन किया गया है जिसके निम्नलिखित सदस्य होंगे :-

  1. जिला प्रशासन द्वारा नामित अधिकारी।
  2. संबंधित थाने का थानाध्यक्ष अथवा उसका प्रनतिनिधि।
  3. क्षेत्रीय अधिकारी, उ०प्र० प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नामित अधिकारी।

भारत सरकार द्वारा वातावरणीय ध्वनि के मानक निर्धारित किए जा चुके है तथा इस सम्बन्ध में प्रदेश सरकार द्वारा सभी जिलाधिकारियों को इन मानको के कियान्वयन हेतु सूचित किया गया है।

जीव चिकित्सा अपशिष्ट (प्रबन्ध एवं हस्तन) नियम, 1998 यथा संशोधित जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबन्धन नियम-2016 अस्पतालों / नर्सिग होम / पैथोलॉजी लैब आदि से जनित अपशिष्ट के उचित उपचार एवं निस्तारण हेतु जीव चिकित्सा अपशिष्ट (प्रबन्ध एवं हस्तन) नियम, 1998 की अधिसूचना 27 जुलाईए 1998 को भारत सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-6, धारा-8 और धारा-25 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है तथा ये नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगें जो किसी रूप में जीव चिकित्सा अपशिष्ट का जननए संग्रहणए ग्रहणए भण्डारणए परिवहन उपचार व्ययन व हस्तन करते है। इन नियमों के उपबन्धों के प्रवर्तन के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विहित प्राधिकारी है। इस नियम के अर्न्तगत अस्पतालों ध् नर्सिग होम ध् पैथोलौजी लैब क्लीनिकआदि जो बायोमेडिकल बेस्ट जनित करते है को बोर्ड से प्राधिकार प्राप्त करना आवश्यक है। अपशिष्ट शोधन सुविधा शुरू करने के लिए नियत समय: